भास्कर न्यूज | हरसूद (खंडवा)विद्यार्थी किताबें पढ़ते-पढ़ते पास होते हैं, लेकिन यह विद्यार्थी पढ़ाई के साथ किताब लिखते-लिखते न केवल पास हुआ बल्कि 12वीं की प्रदेश की प्रावीण्य सूची में तीसरा स्थान भी बना लिया। आर्ट्स विषय में 93.6 प्रतिशत अंकों के साथ यह उपलब्धि हासिल करने वाले हरसूद निवासी छात्र संस्कार पिता ऋषिराज शुक्ला ने 150 पन्नों की यह किताब हिंदी और अंग्रेजी में लिखी है। हिंदी में नाम दिया विद्यार्थी की अधूरी आत्महत्या और अंग्रेजी में द हाफ सुसाइड ऑफ स्टूडेंट। दरअसल कक्षा 11वीं में पढ़ने के दौरान संस्कार के दो साथी मोनू (कामर्स) व अमन (साइंस) ने आत्महत्या कर ली थी। परिजन द्वारा इन विद्यार्थियों को उनकी रुचि के विषय के बजाय अपनी पसंद के विषय दिलाए गए। जिस कारण इन्होंने यह कदम उठाया। यहां फिल्म थ्री इडियट का वह संवाद सटीक बैठता है कि साइंस ने तरक्की तो बहुत कर ली लेकिन दिमाग का प्रेशर नापने वाली मशीन ही नहीं बनाई। शेष|पेज 2 परसंदेश :93.6 %संस्कार शुक्लासंकाय-आर्ट्ससंस्कार ने कक्षा 10वीं में जिले की प्रावीण्य सूची में भी तीसरा स्थान बनाया था। उसने आर्ट्स विषय के लिए निजी स्कूल छोड़कर उत्कृष्ट स्कूल में प्रवेश लिया। स्कूल में पूरे समय उपस्थिति दी। 12वीं की पढ़ाई के दौरान पुस्तक भी लिख रहा था। एकाग्रता के लिए सुबह योगा और ध्यान किया। इस परिणाम ने मेरा हौसला बढ़ाया है। आईएस बनकर लोगों की सेवा का सपना है।भास्कर न्यूज | हरसूद (खंडवा)विद्यार्थी किताबें पढ़ते-पढ़ते पास होते हैं, लेकिन यह विद्यार्थी पढ़ाई के साथ किताब लिखते-लिखते न केवल पास हुआ बल्कि 12वीं की प्रदेश की प्रावीण्य सूची में तीसरा स्थान भी बना लिया। आर्ट्स विषय में 93.6 प्रतिशत अंकों के साथ यह उपलब्धि हासिल करने वाले हरसूद निवासी छात्र संस्कार पिता ऋषिराज शुक्ला ने 150 पन्नों की यह किताब हिंदी और अंग्रेजी में लिखी है। हिंदी में नाम दिया विद्यार्थी की अधूरी आत्महत्या और अंग्रेजी में द हाफ सुसाइड ऑफ स्टूडेंट। दरअसल कक्षा 11वीं में पढ़ने के दौरान संस्कार के दो साथी मोनू (कामर्स) व अमन (साइंस) ने आत्महत्या कर ली थी। परिजन द्वारा इन विद्यार्थियों को उनकी रुचि के विषय के बजाय अपनी पसंद के विषय दिलाए गए। जिस कारण इन्होंने यह कदम उठाया। यहां फिल्म थ्री इडियट का वह संवाद सटीक बैठता है कि साइंस ने तरक्की तो बहुत कर ली लेकिन दिमाग का प्रेशर नापने वाली मशीन ही नहीं बनाई। शेष|पेज 2 परपुनासा (खंडवा) | ईश्वर किसी से कुछ छीनता है तो उसे तोहफा भी जरूर देता है। ऐसे ही उदाहरण है पुनासा के उत्कृष्ट विद्यालय अर्जुन गुर्जर, जिनकी दृष्टि नहीं है फिर भी उन्होंने स्मरण शक्ति के बल पर 10वीं की प्रदेश प्रावीण्य सूची में दृष्टिही वर्ग में पहला स्थान बनाया। रीछी निवासी अरुण बलराम गुर्जर ने 89.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने कहा मैं एक बार जो सुन लेता हूं वह हमेशा के लिए याद हो जाता है। इसी खूबी के कारण मुझे बचपन से ही शिक्षकों का साथ मिला। कक्षा में मुझे सबसे आगे बैठाया जाता था ताकि मैं शिक्षकों की बातें ध्यान से सुन सकूं। दिव्यांग वर्ग में प्रदेश में मुझे पहला स्थान मिलने की बस इतनी ही कहानी है।इस उपलब्धि से मैं खुश हूं। वे बताते हैं इस सफलता के असली हकदार शिक्षक हैं। अगर मैं कोई बात सुनने से चूक जाता तो शिक्षक दोबारा बताते व समझाते थे। दूसरा श्रेय मुझे प्रतिदिन स्कूल तक साथ ले जाने और लाने वाले सहपाठियों का है जिन्होंने कभी भी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मेरा अगला लक्ष्य आर्ट्स विषय की पड़ाई कर शासकीय सेवा में शामिल होना है। अब मैं ब्रेल लिपि सीखना चाहता हूं।अरुण के माता-पिता खेतों में मजदूरी करते हैं।89.4%अरुण गुर्जरपुनासा (खंडवा) | ईश्वर किसी से कुछ छीनता है तो उसे तोहफा भी जरूर देता है। ऐसे ही उदाहरण है पुनासा के उत्कृष्ट विद्यालय अर्जुन गुर्जर, जिनकी दृष्टि नहीं है फिर भी उन्होंने स्मरण शक्ति के बल पर 10वीं की प्रदेश प्रावीण्य सूची में दृष्टिही वर्ग में पहला स्थान बनाया। रीछी निवासी अरुण बलराम गुर्जर ने 89.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने कहा मैं एक बार जो सुन लेता हूं वह हमेशा के लिए याद हो जाता है। इसी खूबी के कारण मुझे बचपन से ही शिक्षकों का साथ मिला। कक्षा में मुझे सबसे आगे बैठाया जाता था ताकि मैं शिक्षकों की बातें ध्यान से सुन सकूं। दिव्यांग वर्ग में प्रदेश में मुझे पहला स्थान मिलने की बस इतनी ही कहानी है।इस उपलब्धि से मैं खुश हूं। वे बताते हैं इस सफलता के असली हकदार शिक्षक हैं। अगर मैं कोई बात सुनने से चूक जाता तो शिक्षक दोबारा बताते व समझाते थे। दूसरा श्रेय मुझे प्रतिदिन स्कूल तक साथ ले जाने और लाने वाले सहपाठियों का है जिन्होंने कभी भी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मेरा अगला लक्ष्य आर्ट्स विषय की पड़ाई कर शासकीय सेवा में शामिल होना है। अब मैं ब्रेल लिपि सीखना चाहता हूं।अरुण के माता-पिता खेतों में मजदूरी करते हैं।बुरहानपुर | माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम में बुरहानपुर जिले से तीन विद्यार्थियों ने प्रदेश की प्रावीण्य सूची में स्थान बनाया। इनमें दो छात्राएं हैं। नेपानगर के लाइनमैन ज्ञानेश्वर पाटील की बेटी साक्षी ने 99.2 प्रतिशत अंक के साथ तीसरा स्थान पाया। वहीं टेलर परशुराम बेनुस्कर के बेटे हर्ष ने 98.4 प्रतिशत अंक के साथ सातवां और ट्रैक्टर ड्राइवर रईस बख्श की बेटी युशरा ने 98 प्रतिशत अंक के साथ नौवां स्थान हासिल किया। फिलहाल मुंबई के कल्याण में बुआ के यहां गई साक्षी ने कम्प्यूटर तो युशरा ने माेबाइल पर रिजल्ट देखा। वहीं स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण हर्ष ने साइबर कैफे पर जाकर रिजल्ट देखा। तीनों ने विषयवार टाइम टेबल बनाकर कठिन विषयों को प्राथमिकता देते हुए दिन में चार से सात घंटे तक पढ़ाई की। पिछले तीन साल की तरह ही कक्षा 12वीं की प्रदेश स्तरीय प्रावीण्य सूची में इस साल भी जिले से एक भी विद्यार्थी स्थान नहीं बना पाया।साक्षी पाटिल 99.2%हर्ष बेनुस्कर 98.4%युशरा बख्श
Source: Dainik Bhaskar May 16, 2019 02:26 UTC